अंतरिक्ष में जीवन पैदा करने की तैयारी

धरती से बाहर अंतरिक्ष में और सुदूरवर्ती ग्रहों पर जीवन की तलाश के साथ ही जीवन को रचने की संभावना को लेकर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

धरती से बाहर अंतरिक्ष में और सुदूरवर्ती ग्रहों पर जीवन की तलाश के साथ ही जीवन को रचने की संभावना को लेकर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इस दिशा में वैज्ञानिकों को छह से चल रहे एक प्रयोग में सफलता मिली है। इससे उत्साहित होकर वैज्ञानिक यह मानकर चल रहे हैं कि 30 साल में लोग अंतरिक्ष में रहना शुरू कर देंगे और वहां पहला बच्चा पैदा हो सकेगा। मंगल और चांद पर भी इस तरह के करिश्मे को साकार करने के लिए प्रयोगों पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

मंगल ग्रह को लेकर कुछ वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि लाल ग्रह पर इंसान बच्चे जरूर पैदा कर सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल पर स्पर्म दो सौ साल तक रह सकता है। विशेषज्ञों को अभी तक लगता था कि अंतरिक्ष के विकिरण से स्पर्म खराब हो जाएगा और प्रजनन नामुमकिन होगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) पर छह साल से रखे गए चूहों के शुक्राणुओं (स्पर्म) से स्वस्थ्य बच्चे पैदा हुए हैं। 66 चूहों से लिए गए शुक्राणुओं के नमूनों को को 2012 में 30 से ज्यादा टेस्ट ट्यूब में रखा गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सबसे बेहतर नमूने से बच्चे को पैदा करने का फैसला किया। चार अगस्त, 2013 को तीन नमूनों को आइएसएस भेजा गया।

वापस लाकर तीनों को जापान के सुकूबा में वैसी अंतरिक्ष जैसे कृत्रिम हालात में रखा गया, जिनमें कई तरह के विकिरण थे। धरती पर लाने के बाद वैैज्ञानिकों ने जीन सीक्वेंसिंग की मदद से विकिरण का विश्लेषण किया। पाया गया कि शुक्राणुओं के न्यूक्लियस पर फर्क नहीं पड़ता। जापान की यामानाशी यूनिवर्सिटी में धरती पर रखे विकिरण वाले नमूनों का इसी तरह से विश्लेषण किया गया। जापानी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सयाका वकायमा के मुताबिक, अनुवांशिक रूप से कई सामान्य बच्चे पैदा हुए। यह शोध ‘साइंस अडवांसेज’ जर्नल में छपी है।

शोध के इन नतीजों को लेकर वैज्ञानिक उत्साहित हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल पर शुक्राणु दो सौ साल तक रह सकता है। एरिजोना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिस इम्फे के मुताबिक 30 साल में लोग अंतरिक्ष में रहना शुरू कर देंगे। इसके बाद ही वहां पहला बच्चा पैदा हो सकेगा। चांद और मंगल- दोनों ग्रहों को लेकर भी ऐसी योजना है। इस तरह के शोध की दौड़ चीन और अमेरिका के बीच है।

इसके अलावा अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स समेत कई निजी कंपनियां भी दौड़ में शामिल हैं। चीन और रूस ने भी कई परियोजनाओं के लिए हाथ मिलाया है। मंगल की दूरी चांद से एक हजार गुना ज्यादा मानी जाती है। ऐसे में इंसान धरती के पास ही चांद पर अपनी बस्ती बसाना चाहेगा। रूस के साथ मिलकर चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर 2036 से 2045 के बीच एक दीर्घकालीन केंद्र बनाने की तैयारी में है, जबकि नासा एक दशक में चांद पर स्थायी आधार शिविर बना सकता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद या मंगल पर पहुंचने वाले इंसानों को परिवार बढ़ाने से पहले कुछ साल बिताकर खुद को वहां के अनुरूप ढालना होगा। इसके लिए शोध जारी है। स्पेसएक्स के साथ मिलकर नासा मंगल ग्रह पर भी इंसानी बस्ती बसाना चाहता है। हालांकि, पहला लक्ष्य चांद ही है। एक डच स्टार्टअप कंपनी किसी गर्भवती महिला को अंतरिक्ष में 250 मील तक भेजना चाहती है ताकि वह स्पेस में बच्चे को जन्म दे सके। मगर इसके लिए कानून, मेडिकल और नैतिक बाधाएं हैं। एक और कंपनी ‘आॅर्बिटल एसेंबली कॉरपोरेशन’ 2027 तक पृथ्वी की कक्षा में एक आरामदायक होटल खोलने की तैयारी में है। प्रोफेसर क्रिस इम्फे के मुताबिक 2040 तक अंतरिक्ष में पहला बच्चा पैदा हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) पर छह साल से रखे गए चूहों के शुक्राणुओं (स्पर्म) से स्वस्थ्य बच्चे पैदा हुए हैं। अब आगे के लिए अंतरिक्ष में विकिरण से होने वाले नुकसान का डर खत्म हो गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल पर शुक्राणु दो सौ साल तक रह सकता है। एरिजोना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिस इम्फे के मुताबिक अगले 30 साल में लोग अंतरिक्ष में रहना शुरू कर देंगे। इसके बाद ही वहां पहला बच्चा पैदा हो सकेगा। चांद और मंगल- दोनों ग्रहों को लेकर भी ऐसी योजना है।

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