मोदी सरकार की इस स्कीम में 5.25 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार, 6322 करोड़ रुपए का किया प्रावधान

केंद्र सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम चला रही है। अब केंद्रीय कैबिनेट ने स्पेशियलिटी स्टील सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम को मंजूरी दे दी है। स्कीम के तहत कंपनियों को 4 से 12% तक का इंसेंटिव दिया जाएगा।

केंद्र की मोदी सरकार देश में रोजगार बढ़ाने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है। इसके लिए सरकार प्रोडक्शन लिंक्ड (पीएलआई) स्कीम लेकर आई है। इस स्कीम को धीरे-धीरे कई सेक्टर्स में लागू किया जा रहा है। अब सरकार ने स्टील सेक्टर में इस स्कीम को लागू करने को मंजूरी दी है।

गुरुवार को आयोजित बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने स्पेशियलिटी स्टील सेक्टर में पीएलआई स्कीम लागू करने को मंजूरी दी। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह स्कीम पांच साल के लिए होगी और वित्त वर्ष 2023-24 से लागू होगी। इस स्कीम में पांच साल में सरकार की ओर से स्टील उत्पादन कंपनियों को 6,322 करोड़ रुपए का इंसेंटिव देगी। उन्होंने कहा कि इस स्कीम से करीब 5.25 लाख लोगों के लिए रोजगार की उम्मीद है। इसमें से करीब 68 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

4 से 12% इंसेंटिव दिया जाएगा: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस स्कीम के तहत करीब 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। इससे देश में स्टील उत्पादन की कुल क्षमता में 25 मिलिटन टन की बढ़ोतरी होगी। स्कीम के तहत उत्पादन का लक्ष्य पूरा करने वाली योग्य कंपनियों को 4 से 12% का इंसेंटिव दिया जाएगा। यह इंसेंटिव पांच साल तक दिया जाएगा।

200 करोड़ रुपए से ज्यादा नेटवर्थ वाली कंपनी शामिल हो सकेगी: केंद्र मंत्री ने कहा कि प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम में स्टील सेक्टर की 200 करोड़ रुपए से ज्यादा नेटवर्थ वाली कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इस स्कीम के तहत कंपनियां कोटेड-प्लेटेड स्टील, हाई स्ट्रेंथ स्टील, स्पेशियलिटी रेल्स, एलॉय स्टील प्रोडक्ट, स्टील वायर और इलेक्ट्रीकल स्टील का उत्पादन कर सकेंगी। भारत में रजिस्टर्ड और स्पेशियलिटी स्टील के उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को स्कीम के लिए योग्य माना जाएगा।

क्या है पीएलआई स्कीम?: देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए मोदी सरकार ने पीएलआई स्कीम लॉन्च की है। इसके तहत सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को 1.46 लाख करोड़ रुपए का इंसेंटिव देने का लक्ष्य रखा है। यह राशि पांच साल में दी जाती है। अभी तक मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, मेडिकल डिवाइसेज उत्पादन से जुड़े सेक्टर्स के लिए इस स्कीम को लागू किया जा चुका है।

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