संपादकीय: उम्मीद का टीका – Jansatta

हमारे यहां कोविड 19 का टीका जल्दी से जल्दी बाजार में आना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस विषाणु के चक्र को तोड़ने के लिए आजमाए जा चुके अब तक के सारे उपाय विफल साबित हुए हैं। जब से बंदी खुली है, लोग मनमाने तरीके से बाहर निकलने लगे हैं।

अब कोरोना विषाणु का चक्र तोड़ने को लेकर उम्मीद बलवती हो गई है। ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने अपने यहां कोरोना के टीके को अंतिम मंजूरी दी है। वहां की दवा एवं स्वास्थ्य उत्पाद नियामक एजेंसी ने दवा कंपनी फाइजर द्वारा तैयार टीके को पंचानबे फीसद तक सुरक्षित और प्रभावकारी करार दिया है।

अब वहां यह टीका आम लोगों के उपयोग के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकेगा। पिछले दिनों सीरो और आक्सफर्ड के टीके को लेकर जिस तरह विवाद खड़ा हो गया था, उससे लग रहा था कि कोरोना टीकों के परीक्षण में बड़ा अवरोध उत्पन्न हो गया है।

सीरो के टीके का एक प्रतिनिधि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। उसका उसके दिमाग पर बुरा असर दिखाई देने लगा था, जिसके चलते उसने कंपनी पर भारी भरपाई का दावा ठोक दिया था। उसके बचाव में भारतीय स्वास्थ्य विभाग को भी उतरना पड़ा। फाइजर के टीके को मंजूरी मिलने से निस्संदेह दूसरे टीकों के परीक्षण को कुछ बल मिलेगा। वह टीका दूसरे देशों के बाजारों में भी उतारा जा सकेगा।

यों कोविड 19 जैसे विषाणु को रोकने वाले टीकों का परीक्षण काफी जटिल होता है। इसका हर चरण जोखिम भरा होता है। जिन लोगों पर ऐसे टीकों का परीक्षण किया जाता है, उनके जान को भी खतरा रहता है। कई बार परीक्षण में इस्तेमाल टीके के प्रतिकूल असर के चलते प्रतिनिधि में आजीवन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रह सकती हैं।

इसलिए बहुत सारे विशेषज्ञ दवाओं के मनुष्य पर परीक्षण का विरोध करते रहे हैं। मगर दिक्कत यह है कि बिना मनुष्य पर परीक्षण के दवा के बारे में अंतिम रूप से कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसी क्रम में सीरो के टीके का बुरा प्रभाव नजर आया था। भारत के स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यहां भी जल्दी ही कोरोना का टीका बाजार में आ जाएगा। सीरो के टीके में पाई गई खामियों को जल्दी दूर कर लिया जाएगा।

हमारे यहां कोविड 19 का टीका जल्दी से जल्दी बाजार में आना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस विषाणु के चक्र को तोड़ने के लिए आजमाए जा चुके अब तक के सारे उपाय विफल साबित हुए हैं। जब से बंदी खुली है, लोग मनमाने तरीके से बाहर निकलने लगे हैं।

उन्हें नाक-मुंह ढंकने जैसे एहतियाती उपायों पर अमल न करने के लिए भी दंडित करना पड़ रहा है। कई राज्यों में दुबारा आंशिक बंदी लगानी पड़ी है। दूरदराज के गांवों और कस्बों में इस लापरवाही से अधिक खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की चिंता है कि किस तरह इसके संक्रमण का चक्र तोड़ा जाए।

फिलहाल शुरुआती चरण में सबको टीका उपलब्ध कराना सरकारों के सामने बड़ी चुनौती होगी, मगर जितने भी लोगों तक इसकी पहुंच संभव हो पाएगी, उतने से ही इस पर काफी हद तक लगामा लगाई जा सकेगी। हालांकि टीके के बाजार में आने के बाद भी हाथ धोने, उचित दूरी बनाए रखने, नाक-मुंह ढंक कर ही बाहर निकलने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ लेते रहने की जरूरत बनी रहेगी।

किसी भी विषाणु को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। कोरोना का विषाणु भी खत्म नहीं होने वाला। टीका सिर्फ लोगों में उससे लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकेगा। इसलिए लोगों से यह अपेक्षा सदा बनी रहेगी कि वे इस विषाणु से बचाव के एहतियाती उपाय इस्तेमाल करते रहें। ब्रिटेन में टीके के आ जाने से निस्संदेह स्वास्थ्य विज्ञानियों का मनोबल बढ़ा है कि वे इस चुनौतीपूर्ण संक्रमण को रोकने की दिशा में कामयाबी के बहुत करीब पहुंच गए हैं।

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