Saira banu Birthday Special: Saira Banu had come to see Dilip Kumar on the sets of the film, was heartbroken in the very first meeting

12 साल की उम्र से सायरा बानो दिलीप कुमार को पसंद करती थीं। तभी उन्होंने ठान लिया था कि शादी तो वह दिलीप कुमार से ही करेंगी।

सायरा बानू और दिलीप कुमार की प्रेम कहानी से हर कोई वाकिफ है। सायरा बानो ने पहली बार दिलीप कुमार को 12 साल की उम्र में देखा था। तभी से वह उनकी फैन हो गई थीं। खास बात ये है कि उस उम्र में ही सायरा बानो ने ये ठान लिया था कि वह शादी करेंगी तो यूसुफ खान (दिलीप कुमार) से ही। अब सायरा बानो दिलीप कुमार से मिलना चाहती थीं। ऐसे में उनकी ये ख्वाहिश एक साल के भीतर ही पूरी हो गई। सायरा को 13 साल की उम्र में यूसुफ खान से मिलने का मौका मिला। इस किस्से को सायरा बानो ने खुद बयां किया था।

वाइल्ड फिल्म्स इंडिया के यूट्यूब चैनल के एक वीडियो में सायरा बानो कहती नजर आईं- ‘मैं तो 12 बरस की उम्र से जानती थी कि मेरा निकाह यूसुफ साहब से होगा। मैंने ये बात बारह बरस की उम्र में ही ठान ली थी। कि अगर मैं निकाह करूंगी तो इंशाल्लाह वो यूसुफ साहब ही होंगे। ये मेरा सपना था और ये सपना हकीकत में बदल गया।’

सायरा बानो ने आगे बताया था- ‘मुझे याद है मुगल-ए-आजम का सेट लगा हुआ था। मेरे वाल्दा मेरे भाई मेरी नानी हम सब लंदन में रहा करते थे। मेरे भाई की और मेरी पढ़ाई वहीं से हो रही थी, वहां हमारा घर था। लंबी छुट्टियां पड़ती थीं- जुलाई से सितंबर तब हम पूरा यूरोप देखते थे। फिर भारत लौटते थे। हमारे वाल्दा की यही कोशिश थी कि वहां हमें बेहतरीन से बेहतरीन तालीम मिले और हम अपने देसीपन से भी जुड़े रहें। उस दौरान हम मुगल ए आजम के सेट पर जाने के लिए तैयार हुए थे।’

सायरा बानो ने आगे कहा था- ‘मेरे पिता की एक अच्छी दोस्त थीं जो लंदन में ही रहती थीं उन्होंने कहा कि शूटिंग देखनी है? तो ऐसे आपा ने यूसुफ साहब को फोन किया। हम सेट पर पहुंचे तो मैंने देखा कि स्टेज की तरफ जो दरवाजा था उस तरफ यूसुफ साहब खड़े थे। हाथ बांधे सफेद शर्ट और पैंट उन्होंने पहनी हुई थी। उस वक्त मेरी एज 13 साल थी। 12 साल की जब थी तब तो उन्हें पहली बार देखा था। उस दिन यूसुफ साहब को देख कर मैंने सोचा अरे बाबा इनका तो पैक अप हो गया। मैं फिल्मफैन थी। मैगजीन्स में लपक कर देखती थी कि कौन हीरो हिरोइन कहां हैं क्या कर रहा है।’

दिलीप कुमार को जब देखती रह गईं सायरा बानो: ‘जब यूसुफ साहब ने मुझे और मेरे वाल्दा को देखा तो वह हमारी गाड़ी की तरफ बढ़े। तब इन्होंने बताया कि शूटिंग का तो पैकअप हो गया है। लेकिन आप अंदर चलें कव्वाली गाना चल रहा है। उस दिन मेरा दिल टूट गया पहले कि अरे यूसुफ साहब की शूटिंग नहीं देख पाई मैं। हालांकि हम फिर अंदर गए और इन्होंने ही हमें सबसे मिलवाया। उस वक्त कव्वाली चल रही थी पर मुझे कोई होश ही नहीं था, क्योंकि यूसुफ साहब आगे खड़े थे। वहीं से मैंने नोटिस किया कि दिलीप साहब कितने सिंपल हैं, उनकी यही क्वालिटी थी जिसने मुझे जीत लिया।’

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